महाभारत 3.176.36
कथं नु तस्यानाथाया मद्विनाशाद्भुजंगमअफलास्ते भविष्यन्ति मयि सर्वे मनोरथाः
kathaṃ nu tasyānāthāyā madvināśādbhujaṃgamaaphalāste bhaviṣyanti mayi sarve manorathāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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