महाभारत 3.176.51
स गत्वा तैस्तदा चिह्नैर्ददर्श गिरिगह्वरेगृहीतं भुजगेन्द्रेण निश्चेष्टमनुजं तथा
sa gatvā taistadā cihnairdadarśa girigahvaregṛhītaṃ bhujagendreṇa niśceṣṭamanujaṃ tathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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