महाभारत 3.178.1
युधिष्ठिर उवाच · yudhiṣṭhira uvāca
भवानेतादृशो लोके वेदवेदाङ्गपारगःब्रूहि किं कुर्वतः कर्म भवेद्गतिरनुत्तमा
bhavānetādṛśo loke vedavedāṅgapāragaḥbrūhi kiṃ kurvataḥ karma bhavedgatiranuttamā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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