महाभारत 3.178.28
युधिष्ठिर उवाच · yudhiṣṭhira uvāca
अहो बुद्धिमतां श्रेष्ठ शुभा बुद्धिरियं तवविदितं वेदितव्यं ते कस्मान्मामनुपृच्छसि
aho buddhimatāṃ śreṣṭha śubhā buddhiriyaṃ tavaviditaṃ veditavyaṃ te kasmānmāmanupṛcchasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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