महाभारत 3.178.32
कृतं कार्यं महाराज त्वया मम परंतपक्षीणः शापः सुकृच्छ्रो मे त्वया संभाष्य साधुना
kṛtaṃ kāryaṃ mahārāja tvayā mama paraṃtapakṣīṇaḥ śāpaḥ sukṛcchro me tvayā saṃbhāṣya sādhunā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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