महाभारत 3.178.42
ततो मे विस्मयो जातस्तद्दृष्ट्वा तपसो बलम्ब्रह्म च ब्राह्मणत्वं च येन त्वाहमचूचुदम्
tato me vismayo jātastaddṛṣṭvā tapaso balambrahma ca brāhmaṇatvaṃ ca yena tvāhamacūcudam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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