महाभारत 3.178.49
ते तु सर्वे द्विजश्रेष्ठाः पाण्डवानां हितेप्सयामैवमित्यब्रुवन्भीमं गर्हयन्तोऽस्य साहसम्
te tu sarve dvijaśreṣṭhāḥ pāṇḍavānāṃ hitepsayāmaivamityabruvanbhīmaṃ garhayanto'sya sāhasam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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