महाभारत 3.178.7
एवमेतद्भवेद्राजन्कार्यापेक्षमनन्तरम्यदभिप्रेतमन्यत्ते ब्रूहि यावद्ब्रवीम्यहम्
evametadbhavedrājankāryāpekṣamanantaramyadabhipretamanyatte brūhi yāvadbravīmyaham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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