महाभारत 3.180.40
तमागतमृषिं वृद्धं बहुवर्षसहस्रिणम्आनर्चुर्ब्राह्मणाः सर्वे कृष्णश्च सह पाण्डवैः
tamāgatamṛṣiṃ vṛddhaṃ bahuvarṣasahasriṇamānarcurbrāhmaṇāḥ sarve kṛṣṇaśca saha pāṇḍavaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें