महाभारत 3.180.41
तमर्चितं सुविश्वस्तमासीनमृषिसत्तमम्ब्राह्मणानां मतेनाह पाण्डवानां च केशवः
tamarcitaṃ suviśvastamāsīnamṛṣisattamambrāhmaṇānāṃ matenāha pāṇḍavānāṃ ca keśavaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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