महाभारत 3.180.5
बहुवत्सरजीवी च मार्कण्डेयो महातपाःस्वाध्यायतपसा युक्तः क्षिप्रं युष्मान्समेष्यति
bahuvatsarajīvī ca mārkaṇḍeyo mahātapāḥsvādhyāyatapasā yuktaḥ kṣipraṃ yuṣmānsameṣyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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