महाभारत 3.180.6
तथैव तस्य ब्रुवतः प्रत्यदृश्यत केशवःसैन्यसुग्रीवयुक्तेन रथेन रथिनां वरः
tathaiva tasya bruvataḥ pratyadṛśyata keśavaḥsainyasugrīvayuktena rathena rathināṃ varaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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