महाभारत 3.181.12
अमोघबलसंकल्पाः सुव्रताः सत्यवादिनःब्रह्मभूता नराः पुण्याः पुराणाः कुरुनन्दन
amoghabalasaṃkalpāḥ suvratāḥ satyavādinaḥbrahmabhūtā narāḥ puṇyāḥ purāṇāḥ kurunandana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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