महाभारत 3.181.17
कामक्रोधाभिभूतास्ते मायाव्याजोपजीविनःलोभमोहाभिभूताश्च त्यक्ता देवैस्ततो नराः
kāmakrodhābhibhūtāste māyāvyājopajīvinaḥlobhamohābhibhūtāśca tyaktā devaistato narāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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