महाभारत 3.181.25
तत्रास्य स्वकृतं कर्म छायेवानुगतं सदाफलत्यथ सुखार्हो वा दुःखार्हो वापि जायते
tatrāsya svakṛtaṃ karma chāyevānugataṃ sadāphalatyatha sukhārho vā duḥkhārho vāpi jāyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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