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महाभारत 3.181.32
किंचिद्दैवाद्धठात्किंचित्किंचिदेव स्वकर्मभिःप्राप्नुवन्ति नरा राजन्मा तेऽस्त्वन्या विचारणा
kiṃciddaivāddhaṭhātkiṃcitkiṃcideva svakarmabhiḥprāpnuvanti narā rājanmā te'stvanyā vicāraṇā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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