महाभारत 3.181.8
ऐहलौकिकमेवैतदुताहो पारलौकिकम्क्व च कर्माणि तिष्ठन्ति जन्तोः प्रेतस्य भार्गव
aihalaukikamevaitadutāho pāralaukikamkva ca karmāṇi tiṣṭhanti jantoḥ pretasya bhārgava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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