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महाभारत 3.184.13
सरस्वत्युवाचन चाशुचिर्नाप्यनिर्णिक्तपाणि;र्नाब्रह्मविज्जुहुयान्नाविपश्चित्बुभुक्षवः शुचिकामा हि देवा; नाश्रद्दधानाद्धि हविर्जुषन्ति
sarasvatyuvācana cāśucirnāpyanirṇiktapāṇi;rnābrahmavijjuhuyānnāvipaścitbubhukṣavaḥ śucikāmā hi devā; nāśraddadhānāddhi havirjuṣanti
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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