महाभारत 3.185.12
स तत्र ववृधे राजन्मत्स्यः परमसत्कृतःपुत्रवच्चाकरोत्तस्मिन्मनुर्भावं विशेषतः
sa tatra vavṛdhe rājanmatsyaḥ paramasatkṛtaḥputravaccākarottasminmanurbhāvaṃ viśeṣataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें