महाभारत 3.185.13अथ कालेन महता स मत्स्यः सुमहानभूत्अलिञ्जरे जले चैव नासौ समभवत्किलatha kālena mahatā sa matsyaḥ sumahānabhūtaliñjare jale caiva nāsau samabhavatkilaइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें