महाभारत 3.185.39स ततार तया नावा समुद्रं मनुजेश्वरनृत्यमानमिवोर्मीभिर्गर्जमानमिवाम्भसाsa tatāra tayā nāvā samudraṃ manujeśvaranṛtyamānamivormībhirgarjamānamivāmbhasāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें