महाभारत 3.185.4
ऊर्ध्वबाहुर्विशालायां बदर्यां स नराधिपःएकपादस्थितस्तीव्रं चचार सुमहत्तपः
ūrdhvabāhurviśālāyāṃ badaryāṃ sa narādhipaḥekapādasthitastīvraṃ cacāra sumahattapaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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