महाभारत 3.186.124तव देव शरीरस्था देवदानवराक्षसाःयक्षगन्धर्वनागाश्च जगत्स्थावरजङ्गमम्tava deva śarīrasthā devadānavarākṣasāḥyakṣagandharvanāgāśca jagatsthāvarajaṅgamamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें