महाभारत 3.186.19
त्रीणि वर्षसहस्राणि त्रेतायुगमिहोच्यतेतस्य तावच्छती संध्या संध्यांशश्च ततः परम्
trīṇi varṣasahasrāṇi tretāyugamihocyatetasya tāvacchatī saṃdhyā saṃdhyāṃśaśca tataḥ param
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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