महाभारत 3.186.46
भूयिष्ठं कूटमानैश्च पण्यं विक्रीणते जनाःवणिजश्च नरव्याघ्र बहुमाया भवन्त्युत
bhūyiṣṭhaṃ kūṭamānaiśca paṇyaṃ vikrīṇate janāḥvaṇijaśca naravyāghra bahumāyā bhavantyuta
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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