महाभारत 3.186.54
क्षीणे युगे महाराज तरुणा वृद्धशीलिनःतरुणानां च यच्छीलं तद्वृद्धेषु प्रजायते
kṣīṇe yuge mahārāja taruṇā vṛddhaśīlinaḥtaruṇānāṃ ca yacchīlaṃ tadvṛddheṣu prajāyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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