महाभारत 3.186.7
तस्मात्सर्वान्तको मृत्युर्जरा वा देहनाशिनीन त्वा विशति विप्रर्षे प्रसादात्परमेष्ठिनः
tasmātsarvāntako mṛtyurjarā vā dehanāśinīna tvā viśati viprarṣe prasādātparameṣṭhinaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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