महाभारत 3.186.83
उपविष्टं महाराज पूर्णेन्दुसदृशाननम्फुल्लपद्मविशालाक्षं बालं पश्यामि भारत
upaviṣṭaṃ mahārāja pūrṇendusadṛśānanamphullapadmaviśālākṣaṃ bālaṃ paśyāmi bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें