महाभारत 3.186.99
यजन्ते हि तदा राजन्ब्राह्मणा बहुभिः सवैःक्षत्रियाश्च प्रवर्तन्ते सर्ववर्णानुरञ्जने
yajante hi tadā rājanbrāhmaṇā bahubhiḥ savaiḥkṣatriyāśca pravartante sarvavarṇānurañjane
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें