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महाभारत 3.187.2
पितृभक्तोऽसि विप्रर्षे मां चैव शरणं गतःअतो दृष्टोऽस्मि ते साक्षाद्ब्रह्मचर्यं च ते महत्
pitṛbhakto'si viprarṣe māṃ caiva śaraṇaṃ gataḥato dṛṣṭo'smi te sākṣādbrahmacaryaṃ ca te mahat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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