महाभारत 3.187.36
यच्च किंचित्त्वया प्राप्तं मयि क्लेशात्मकं द्विजसुखोदयाय तत्सर्वं श्रेयसे च तवानघ
yacca kiṃcittvayā prāptaṃ mayi kleśātmakaṃ dvijasukhodayāya tatsarvaṃ śreyase ca tavānagha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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