महाभारत 3.187.39
यावद्युगानां विप्रर्षे सहस्रपरिवर्तनम्तावत्स्वपिमि विश्वात्मा सर्वलोकपितामहः
yāvadyugānāṃ viprarṣe sahasraparivartanamtāvatsvapimi viśvātmā sarvalokapitāmahaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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