महाभारत 3.187.41
मया च विप्र दत्तोऽयं वरस्ते ब्रह्मरूपिणाअसकृत्परितुष्टेन विप्रर्षिगणपूजित
mayā ca vipra datto'yaṃ varaste brahmarūpiṇāasakṛtparituṣṭena viprarṣigaṇapūjita
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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