महाभारत 3.187.5
अहं विष्णुरहं ब्रह्मा शक्रश्चाहं सुराधिपःअहं वैश्रवणो राजा यमः प्रेताधिपस्तथा
ahaṃ viṣṇurahaṃ brahmā śakraścāhaṃ surādhipaḥahaṃ vaiśravaṇo rājā yamaḥ pretādhipastathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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