महाभारत 3.188.14
राजानो ब्राह्मणा वैश्याः शूद्राश्चैव युधिष्ठिरव्याजैर्धर्मं चरिष्यन्ति धर्मवैतंसिका नराः
rājāno brāhmaṇā vaiśyāḥ śūdrāścaiva yudhiṣṭhiravyājairdharmaṃ cariṣyanti dharmavaitaṃsikā narāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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