महाभारत 3.188.22
अन्योन्यं परिमुष्णन्तो हिंसयन्तश्च मानवाःअजपा नास्तिकाः स्तेना भविष्यन्ति युगक्षये
anyonyaṃ parimuṣṇanto hiṃsayantaśca mānavāḥajapā nāstikāḥ stenā bhaviṣyanti yugakṣaye
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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