Loading
महाभारत 3.188.52
म्लेच्छाः क्रूराः सर्वभक्षा दारुणाः सर्वकर्मसुभाविनः पश्चिमे काले मनुष्या नात्र संशयः
mlecchāḥ krūrāḥ sarvabhakṣā dāruṇāḥ sarvakarmasubhāvinaḥ paścime kāle manuṣyā nātra saṃśayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें