महाभारत 3.188.56
आरामांश्चैव वृक्षांश्च नाशयिष्यन्ति निर्व्यथाःभविता संक्षयो लोके जीवितस्य च देहिनाम्
ārāmāṃścaiva vṛkṣāṃśca nāśayiṣyanti nirvyathāḥbhavitā saṃkṣayo loke jīvitasya ca dehinām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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