महाभारत 3.19.7
सूत उवाच · sūta uvāca
जानार्दने न मे मोहो नापि मे भयमाविशत्अतिभारं तु ते मन्ये शाल्वं केशवनन्दन
jānārdane na me moho nāpi me bhayamāviśatatibhāraṃ tu te manye śālvaṃ keśavanandana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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