महाभारत 3.190.78वामदेव उवाच · vāmadeva uvācaसंस्पृशैनां महिषीं सायकेन; ततस्तस्मादेनसो मोक्ष्यसे त्वम्saṃspṛśaināṃ mahiṣīṃ sāyakena; tatastasmādenaso mokṣyase tvamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें