महाभारत 3.192.7
यथा स राजा इक्ष्वाकुः कुवलाश्वो महीपतिःधुन्धुमारत्वमगमत्तच्छृणुष्व महीपते
yathā sa rājā ikṣvākuḥ kuvalāśvo mahīpatiḥdhundhumāratvamagamattacchṛṇuṣva mahīpate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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