महाभारत 3.196.5
मन्येऽहं गुरुवत्सर्वमेकपत्न्यस्तथा स्त्रियःपतिव्रतानां शुश्रूषा दुष्करा प्रतिभाति मे
manye'haṃ guruvatsarvamekapatnyastathā striyaḥpativratānāṃ śuśrūṣā duṣkarā pratibhāti me
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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