महाभारत 3.197.11
प्रह्वा पर्यचरच्चापि भर्तारमसितेक्षणाआहारेणाथ भक्ष्यैश्च वाक्यैः सुमधुरैस्तथा
prahvā paryacaraccāpi bhartāramasitekṣaṇāāhāreṇātha bhakṣyaiśca vākyaiḥ sumadhuraistathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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