महाभारत 3.197.14
साध्वाचारा शुचिर्दक्षा कुटुम्बस्य हितैषिणीभर्तुश्चापि हितं यत्तत्सततं सानुवर्तते
sādhvācārā śucirdakṣā kuṭumbasya hitaiṣiṇībhartuścāpi hitaṃ yattatsatataṃ sānuvartate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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