महाभारत 3.197.26
ब्राह्मणानां परिभवाद्वातापिश्च दुरात्मवान्अगस्त्यमृषिमासाद्य जीर्णः क्रूरो महासुरः
brāhmaṇānāṃ paribhavādvātāpiśca durātmavānagastyamṛṣimāsādya jīrṇaḥ krūro mahāsuraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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