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महाभारत 3.197.36
ब्रह्मचारी च वेदान्यो अधीयीत द्विजोत्तमःस्वाध्याये चाप्रमत्तो वै तं देवा ब्राह्मणं विदुः
brahmacārī ca vedānyo adhīyīta dvijottamaḥsvādhyāye cāpramatto vai taṃ devā brāhmaṇaṃ viduḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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