महाभारत 3.197.3
उपरिष्टाच्च वृक्षस्य बलाका संन्यलीयततया पुरीषमुत्सृष्टं ब्राह्मणस्य तदोपरि
upariṣṭācca vṛkṣasya balākā saṃnyalīyatatayā purīṣamutsṛṣṭaṃ brāhmaṇasya tadopari
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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