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महाभारत 3.197.44
मार्कण्डेय उवाच · mārkaṇḍeya uvāca
तया विसृष्टो निर्गम्य स्वमेव भवनं ययौविनिन्दन्स द्विजोऽऽत्मानं कौशिको नरसत्तम
tayā visṛṣṭo nirgamya svameva bhavanaṃ yayauvinindansa dvijo''tmānaṃ kauśiko narasattama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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