महाभारत 3.197.4
तामवेक्ष्य ततः क्रुद्धः समपध्यायत द्विजःभृशं क्रोधाभिभूतेन बलाका सा निरीक्षिता
tāmavekṣya tataḥ kruddhaḥ samapadhyāyata dvijaḥbhṛśaṃ krodhābhibhūtena balākā sā nirīkṣitā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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