महाभारत 3.197.7
ग्रामे शुचीनि प्रचरन्कुलानि भरतर्षभप्रविष्टस्तत्कुलं यत्र पूर्वं चरितवांस्तु सः
grāme śucīni pracarankulāni bharatarṣabhapraviṣṭastatkulaṃ yatra pūrvaṃ caritavāṃstu saḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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